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काश तुम ग़ज़ल होती मेरी कलम से...



कागज़ की कश्ती है, कमज़ोर किनारे हैं...



के इनको जगाया क्यों है?



आया हूँ तेरे दर पे मैं तार-तार होकर...



कोई ऐसी जगह ले चल...



કાજળ ભર્યા નયન...



तुम जब नहीं मिलते...



देखनी हैं मुझको तेरे पैरों की तितलियाँ...



इस बार ज़रा बारिश तो आने दो...



मिल जाए एक पिंजरा अपने मन का...



मैं डगर हूँ...



कभी तुम्हारा भी नाम नीचा हो तो तो जानो...



शब्द हमारे...



मन की बातें मन ही माने नहीं...



जैसे कोई ख्वाब हूँ, मैं तेरी नज़र के लिए...



अधूरा ही सही...



और हो बे-मौसम बरसात कभी...



जब तुझे होठों से लगाया मैने....



महेज़ एक एहसास बन के रह गया मैं...



गर मेरे हाथों में खुदा होता...



अपनी कस्ति में हम तूफान लिए फिरते हैं...



क्या खोया है तूने सावन के महीने मे...



मैं तेरा मन जीत ना पाया...



अब मेरे दरवाजे पे वो शाम नही आती...



आज उनको मेरे अल्फ़ाज़ पुराने लगे...



बात होती है मगर बातें नहीं होती...



फिर एक बार चले आओ तुम...



उनकी हथेली से मैं फिसलता रहा...



उस रोज तू मुझसे जुदा हो जाएगा...



एक दिन ऐसा भी आएगा...



और यूँ दिल का मौसम बदलता रहे...



तुम आते हो...



फिर सूखे पत्तों का मौसम आया है...



दिल के सूखे पत्तों की सरसराहट सी है...



सोच के ये के तुम आओगे...



काश तेरे दो पल मिल पाते मुझको...



કોઈ ઓર ની પડખે મુજને જવા ના દે...



वक़्त तो लगता है...



કુમળી કુમળી ઍક નાર બને...



मैं खुद अपने ही किरदार बदलता रहता हूँ...



चला गया है दूर इस कदर कोई...



एक ज्ञान की ज्योत जलाई तूने...



You are my friend, you are…



मौसमों का है गुलाम आदमी...



इस दर से कारवाँ उठाया जाए...



ये भी मगर एक आशियाना था...



दिन ढले यूँ मेरी आवाज़ बुलाएगी तुझे...



देखीं हैं जबसे ज़िंदगी की बारीक़ियाँ मैने...



जब हम तुम साथ चला करते थे...



तू लाख मुझसे दूरियाँ बना ले...



शायरियों में सिमट गयी ज़िंदगी...



तेरे केसरिया जोड़े से सुंदर...



यादों को पानियों मे बहाते चलें...



ए सावन मुझपे बिजलियाँ गिरा दे...



और भला मैं क्या चाहूँ...



वो बारिस की बूंदे थी के तू रोया था...



मेरी सारी बातें धोखा हैं...



ये जो ज़र ज़र से हैं आशियाने...



किसी और से तेरी कमी पूरी भी नहीं होगी...



मुझको भी तोहफा ईद के त्योहार का दे तू...



तुझमें कुछ यादें बना रहा हूँ मैं...



जब कभी दरवाजे पे शाम उतर आएगी...



मुझसे वो दूरियाँ बना रहा होगा...



अपनो की खातिर ना देखे अपने हालात कभी...



फिर ठंडी सूनी सड़कों पे वो बुला रहा था...



Don't You Dare to Compete With Me..



तेरे आँचल में मुझे एक खुशी मिलती हैं...



महज ख्वाब से क्यूँ हो तुम...



भीग जाएगा जो दामन वो तेरा होगा...



तुम इतनी प्यारी बातें कहाँ से लाते हो...



बक्श दे अये खुदा, मुझे खुदा के लिए...



सुबह की धूप जब तेरी ज़ुल्फों से गुजरती है...



माँगा तेरा दामन तो, तन्हाई...



तेरे जीने का कुछ अंदाज़ बदल जाए...



मैं फिर यही शाम ले कर के लौटूँगा...



पर अपनी दो बात कभी हो जाने दे...



A tribute to Holi and Women...



अंबर के जैसा मुझको नीला रंग दे...



ઍક તારી યાદ ભીંજાવે છે મુજને...



मिट्टी का खिलौना नहीं मैं दिल बहलाने के लिए...



इस बार घर से थोड़ी गर्मियाँ ले आना...



अपने चेहरे से गम के पर्दे हटा दो...



तुझसे कभी मुलाकात ना हो तो बेहतर...



कौन कहता है के बस एक नारी है तू...



भूल ना जाऊं कहीं मैं अपने खुदा को...



कहीं तो ऐसी एक दहलीज बना दे यारा...



ठहरो तो ज़रा...



दिल इतना भी मजबूर नहीं है...



तेरे जाने से बिखर जाए ग़ज़ल...



सुनहरी सुबहों का सुलगता सूरज...



ना कोई शिक़वा, ना शिकायत तुमसे...



एक बार तेरा दामन भिगोना है...



मैं फिर वही दोस्त पुराने ढूंढता हूँ...



कोई हवा ना चले...



कुछ बातों को तू अनकही रहने दे...



जलती फ़िज़ाओं मे फिर जन्नत कहाँ से लाऊँ...



तेरे नाम को होटो पे सज़ा रखा है...



अये खुदा मेरे आहेसासों को थोड़ी ज़ुबाँ दे दे...



बरसों बाद साथ चलने का मौसम आया है...



कोई गुल सा मैं खिले जा रहा हूँ...



मेरी तुम्हारी पहेचान अभी बाकी है...



आ रहा हूँ मैं तेरे पास अभी...



किसी रोज तो यूँ ही आ जाना यारा...



और हो ये बरसात कभी...



રોશની થઈને તમે જીંદગી મા આવ્યા...



माँगा खुदा से यार और तुम आए...



मेरे कमरे में तेरी एक झलक रहती है...



दो आँखों से बहती यादें...



ज़िंदगी को बना दी है पहेली हमने...



कड़ी धूप सी देखी रुसवाई तूने...



I want to be friend forever...



के उनके साथ कोई बोलने वाला नहीं था...



जो बीत गया वो गुजर जाता नहीं क्यूँ...



जाने कैसी ये प्यास है, तेरे शहर में...



जब चाँद कहीं पुकारे..



तब मैं तेरे पास दौड़ कर आता हूँ...



अधूरी ख्वाहिशें, अधूरे अरमान क्यूँ हैं...



दोस्ती में कभी हार कर के देखो...



हम उड़ते हुए पत्ते हैं...



संग मेरे चलती है रेल...



हम तुम हैं नदी के दो किनारे, क्या करें...



एक हवा है, तुझे तूफान बना दूँ...



याद आता नहीं कोई, एक तेरे सिवा हमको...



उनके पैरों की सादगी को देखा मैने...



अये खुदा इश्क़ दे, इबादत भी दे...



तुझसे मिलने का बहाना ना मिला...



एक डोर बँधी है तुझसे...



चल दूँ मैं साथ तेरे करके बंद निगाहें...



नया एक दोस्त बनाना चाहती हूँ...



कर तू तेरे वार मैं तैयार हूँ...



सौ रंग तेरी खामोशी के...



रहने दे मेरे हर ओर अंधेरा...



मैं जानता हूँ, तू अब भी मुझे सोचता होगा...



कोई बताए, यारों कैसी होती है खुशी...



कुछ नहीं, बस तेरी आँखों का धोखा है...



जब तुझसे दो बातें हो जातीं हैं...



तुझको देखा है अभी, या देखा है ख्वाब कोई...



शिकवे भी तुम्हारे है, तेवर भी तुम्हारे हैं...



आज अगर तुम यहाँ होते...



मुझको आता नहीं कोई बात छिपाए रखना...



खामोशी का मंज़र मिटाते क्यूँ हो...



सोचतें हैं वो, के हम नगमे कहाँ बनाते हैं...



आज संवर जा ओढ़ के सारा केसरिया जोड़ा...



शायद ये तेरे प्यार के काबिल नहीं है...



दोस्त जैसा एक इंसान मिला है मुझको...



तू एक बार तो मुझको ना कर दे...



खुद को अकेला खड़ा पाया...



यूँ ही नहीं मन बेकाबू है...



एक तरफ तो बैठें हैं हम साकी...



काश हमको भी दे दे तोहफा कोई...



दुनिया ने मुझको तेरा कायल समझ लिया...



ढूंडती है तू जिसको, मैं नहीं हूँ...



पूनम के चाँद को जब देखा है गौर से...



मेहंदी से भरे हाथ तेरे...



तेरी उंगली थाम के मुझे चलने दे...



ज़ेहन में अब कोई ग़ज़ल नहीं आती...



दिल को अपने गम से भरा रखिए...



शहर भर में ये शोर- शराबा किस लिए...



तेरे दिल में मेरा नाम रहने दे...



मत सोच के तेवर दिखा रहा हूँ मैं...



बाद मुद्दत के तुझे हसते हुए देखा है...



गुज़रे तेरे पहलू में हर शाम, ज़रूरी तो नहीं...



सो जा अये दिल, के वो भी सोता होगा...



मैं वक्त कहाँ से लाऊँ...



यादों के समंदर से तू उभर के आया है..



वो तुझे अब तो याद आता होगा...



तेरी चोटी मे गूँथे फूल हों जैसे....



काश हमको भी लिखे खत कोई...



साथ चल दो तो, आसां ये सफ़र हो जाए...



ख़यालों की बातें...



एक रोशनी...



शाम ढले आते हो...



मैं आवारा बादल हूँ...



आजा सावन आजा...



मिल गया कैसे ये हौसला तुमको...



एक दिन ऐसा भी गुजर जाए..



अपनी खिड़की से



एक दुनिया छिपा रखी है मैने



और बाकी तो सब मन के विचार हैं



और बाकी तो सब मन के विचार हैं,


मेरी सांसो मे तू, मेरी बाहों में तू,

यूँ तो बसा है मेरी निगाहों में तू,

दर- हक़ीकत, मैं इस पार हूँ, तू उस पार है,

और बाकी तो सब मन के विचार हैं,


कुछ जाने पहचाने से, कुछ अंजाने से,

मिलता रहा मैं, दिन भर सारे ज़माने से,

शाम-ए आस पास, बचे चन्द किरदार हैं,

और बाकी तो सब मन के विचार हैं,


तेरी यादों मे, तेरी पलकों के बिछोने में,

हम तो रह लेंगे दिल के किसी भी कोने में,

मिले जाए मगर अपनो का प्यार, वही घर बार है,

और बाकी तो सब मन के विचार हैं,



हाँ कर दूँ..



हारा नही हूँ,बस थक गया हूँ..



फिर वो याद आएगा..



काश कभी नींद खुले



कभी लगता है, के तू जैसे



कभी लगता है, के वो चाँद है,

कभी लगता है, के तू जैसे.


कभी निकलता है, कभी शरमाता है,

दिन ढले ना जाने कहाँ जाता है,

देखता है आसमा से छुप छुप के यूँ,

चिलमन के पीछे से देखती हो तू जैसे.

...कभी लगता है, के वो चाँद है

कभी लगता है, के तू जैसे.


ओढ़ कर आया है वो केशरी आँचल,

आँखो मे लगाया है रात का काजल,

सज-संवर रहा है वो कुछ इस तरह,

लगाके काजल, दुपट्टा ओढती हो तू जैसे

...कभी लगता है, के वो चाँद है,

कभी लगता है, के तू जैसे.


हर अदा है उसमे, बस तेरे जैसी,

कोई ले ले एक निगाह मेरे जैसी,

हर शाम करता रहे दीदार तेरे चेहरे का,

मानो चाँद नही, सामने हो तू जैसे.

...कभी लगता है, के वो चाँद है,

कभी लगता है, के तू जैसे.

सौ रंग तेरी खामोशी के



बेरंग हैं मेरे नगमे,

रंग-रंगीली खामोशी तेरी.

क्योंकि,

एक रंग है मेरे लबज़ों का,

सौ रंग तेरी खामोशी के.


अपंग हैं मेरे नगमे,

तेज़ रफ़्तार है खामोशी तेरी.

क्योंकि,

एक अंग है मेरे लबज़ों का,

सौ पंख तेरी खामोशी के.


बे-ढंग हैं मेरे नगमे,

मस्तानी है खामोशी तेरी.

क्योंकि,

एक नूर है मेरे लबज़ों का,

सौ ढंग तेरी खामोशी के.


"be silent, it says a lot"

तेरा भी था



इश्क़ से रोशन एक ज़माना,

मेरा भी था, तेरा भी था.


फूँक दिया जिसको तूने,

वो एक आशियाना,

मेरा भी था, तेरा भी था.


दिन भर मेरी आँखो में रोता था,

रात में तेरी पलकों पे सोता था,

देखा था मिल कर हमने,

वो ख्वाब सुहाना,

मेरा भी था, तेरा भी था.


ना तूने किया कोई मुझसे धोका,

ना मैने तुझको जाने से रोका,

अपने मिलन-जुदाई का,

एक बहाना,

मेरा भी था, तेरा भी था.


इश्क़ से रोशन एक ज़माना,

मेरा भी था, तेरा भी था.


"it wasn't me alone, it was us"

ये ज़िंदगी जद्दो जहद वाली,



तेरी पहचान हवाओं मे



उड़ रहा है तेरा कोई , अरमान हवाओं मे,

इस लिए फैली है तेरी पहचान हवाओं मे|


यूँ सुगंध बिखरी है हर दिशा मे जैसे,

कोई बात पर तूने उड़ा दी है मुस्कान हवाओं मे...


ले जाएँगी तुझको तेरे फलक तक एक दिन,

बस झूल जा इन अनजान हवाओं मे|


शांत आईने सा मेरे ख़यालों का दरिया,

किसिका ख्वाब तिनका बन के उसपे गिरा गया है.

ये लहरें जो उठ रही है मेरे दिल-ओ-जान मे,

किसिके के आने की है फुरकान हवाओं मे|


गुल

हर लफ्ज़ मे ग़ालिब



पानी से पानी लिखना



जब भी मौत आए मुझको



जब भी मौत आए मुझको,

घेरे हों तेरी ज़ुल्फो के साए मुझको|


तेरे पहलू में आखरी रात गुज़रे,

फिर नींद से ना कोई जगाए मुझको|


तेरी हथेली को मेरे अश्कों से भिगोने दे,

लिपट के तुझसे ज़रा सा रो लेने दे.

एक बार बिखर जाउ दामन में तेरे,

फिर कोई ज़िंदगी भर ना रुलाए मुझको|


मैं तो ज़िंदा हूँ, गर्म सांसो से तेरी,

हवाओं से कहो गुरूर ना दिखाए मुझको|


मेरे मेहबूब के आँचल में ही है जन्नत मेरी,

कोई और पाक मंज़र हो तो बताए मुझको|


जब भी मौत आए मुझको..


- गुल

नूर चुराने आया हूँ



  मै तेरे शहर का नूर चुराने आया हूँ,

एक कमशिन सी हूर चुराने आया हूँ.


देख के मेरे मज़बूत इरादे,

कर यकीन कुछ तो ज़रूर चुराने आया हूँ.

मै तेरे शहर का नूर चुराने आया हूँ,


अदाएँ उनकी और निखरती है जिस से,

मै वही गुरूर चुराने आया हूँ.

मै तेरे शहर का नूर चुराने आया हूँ,


"GUL”

अच्छी नही लगती



  पिया तोहसे एक पल जुदाई अच्छी नही लगती,

बिन तेरे ये दुनिया हरज़ाइ अच्छी नही लगती.


कब तक रहूँ मै तन्हा यूँ ही,

अब एक मेरी परछाई अच्छी नही लगती.


डूब गयी हूँ तुझमे साजन इतना,

के और कोई गहराई अच्छी नही लगती.


चाहू तुझे मै इतना साजन,

के अब तेरी बुराई अच्छी नही लगती.


रूठो ना तुम ऐसे मुझसे,

तेरी झूठी ये लड़ाई अच्छी नही लगती..


पिया तोहसे एक पल जुदाई अच्छी नही लगती..


"GUL”

कोई मंज़र नही ऐसा



कोई मंज़र नही ऐसा,

तू जहाँ नही होता.


कोई देखे निगाहों से मेरी,

के तू कहाँ नही होता.


मेरे पास-पास है तू हर पल,

ये एहसास लफ़ज़ो मे बयाँ नही होता..


जी करता है चूम लू तुझको बाहों मे लेकर,

क्या करूँ मगर क तू यहाँ नही होता..


आज कल तो महफ़िलों मे भी तन्हाई है,

तेरे बिन तो माहॉल भी जवां नही होता.


तू तो बस एक एहसाह है मेरे खुदा,

तेरा और कोई निशाँ नही होता.

"GUL”

कोई तो था



कोई तो आह भर रहा था,

अस्कों से निगाह भर रहा था...


सुनाई दे रही थी उसकी तड़फ़,

मे भी चल पड़ा उसकी तरफ..


रोशनी भी ना थी उसके आशियाने मे...

जी रहा था वो एक वीराने मे...


आसुओं से भीगा था दामन उसका,

गम से भारी भारी था मन उसका,


पास जाकर देखा तो वो लगा कुछ मुझसा,

मे भी ये देख कर कुछ देर तो हसा,


पता नही वो मे ही था या मे ना था,

फिर जाना के यारो वहाँ कोई नही एक आईना था ....


“…it was none other...but me…” GUL

एक रोशनी



 गम के बादलों मे छिपि थी,

एक रोशनी.

अंधेरों के काफिलों मे दबी थी,

एक रोशनी.


बेकरार थी कबसे से खिलने के लिए,

अपने चाँद सितारों से मिलने के लिए.

आज फूट कर निकली है तो बिखरने दो,

एक रोशनी.


कभी पलकों मे छुपा लेती हो,

कभी होठों मे दबा लेती हो,

खोल दो इन्हे, हम पे भी बिखरने दो,

एक रोशनी.


देखा है तुझको मैने मुरझाते हुए,

देखा है तुझको मैने बुझ जाते हुए.

आज मगर तुझसे ही होकर बरस रही है,

एक रोशनी...


"...a light of hope…” GUL

एक ग़ज़ल



एक ग़ज़ल कोई ढलते हुए देख रहा हूँ,

तेरे चेहरे को मे खिलते हुए देख रहा हूँ|

 

तेरी आँखें ही दे गयी हैं तुझको धोका,

तेरे अरमानो को उनमे मचलते हुए देख रहा हूँ|

 

जाने किसको नशीब होंगे तेरी ज़ुल्फो के ये साए,

कई दिलो को इनमे उलझते हुए देख रहा हूँ|

 

तुझको पाकर के एक दिन वो सागर हो जाएगा,

तेरे होटो मे कई दरिया छलकते हुए देह रहा हूँ|

 

सिमट गया है सारा आसमान तेरे चहेरे पर,

तेरे माथे पे चाँद को चमकते हुए देख रहा हूँ|

 

"...I see…” GUL



अंधेरा...



रहने दे मेरे हर ओर अंधेरा,

अच्छा लगता है घन-घोर अंधेरा|

 

चुपके से आकर बैठा है पास मेरे,

करता नहीं है कोई शोर अंधेरा|

 

तेरी ज़ुल्फो से भी सुंदर है,

बिखरा है चेहरे पे घन-घोर अंधेरा.

 

महफ़िल सी सजाए बैठे है हम तीनो,

एक मे, एक तन्हाई, और अंधेरा..

 

"...In the dark…” GUL .



सवेरा...



उगने दे मेरे हर ओर सवेरा,

जीवन देता है नया एक और सवेरा.

 

लाया है संग सारी आवाज़े,

करता है कितना शोर सवेरा.

 

तेरे आँचल से भी उजला है,

लिपटा है मुझसे घन-घोर सवेरा.

 

काफिला सा बनता जाता है हरपल,

सौ किर्ने,सौ आवाज़े,और सवेरा..

 

"...a new life every day…” GUL



ऐसी तेरी ख्याति है..



चुपके से दिल मे बस जाती है,

कुछ ऐसी तेरी हस्ती है,कुछ ऐसी तेरी ख्याति है..

 

सादा रूप है तेरा,

सादी तेरी भाषा है,

ऐसा लगता है उसने फ़ुर्सत मे तुझे तराशा है|

ना चाहे कोई मगर तुझपे ग़ज़ल बन जाती है,

कुछ ऐसी तेरी हस्ती है,कुछ ऐसी तेरी ख्याति है..

 

इस दुनिया से मगर अंजानी है तू,

गंगा सा पावन बहता पानी है तू|

है सब दीवाने तेरे,

जाने किसकी दीवानी है तू,

एक युग की बात नही,

हर युग धरती पर आती है,

कुछ ऐसी तेरी हस्ती है, कुछ ऐसी तेरी ख्याति है..

 

चुपके से दिल मे बस जाती है,

कुछ ऐसी तेरी हस्ती है,कुछ ऐसी तेरी ख्याति है.

 

"...the fame…” GUL



ग़ज़ल



तेरे नाम से और निखर जाएगी ग़ज़ल,

बिन तेरे तो बिखर जाएगी ग़ज़ल|

 

जी रही है तेरी सांसो से,

तुझसे जुदा होके तो मर जाएगी ग़ज़ल|

 

दर्द इतना भर दूँगा इसमे,

के तेरे सीने मे उतर जाएगी ग़ज़ल|

 

देख ले एक नज़र भर बस तू,

तो कुछ और संवर जाएगी ग़ज़ल|

 

लिपट के तुझसे इसको रो लेने दे,

ठुकरा दिया तूने तो किधर जाएगी ग़ज़ल|

 

मेरी हर ग़ज़ल पे हक़ है गुल तेरा,

तेरे होटो को छुकर मर जाएगी ग़ज़ल|

 

GUL



नन्ही परी



ढूँढ रहा हु मे एक नन्ही परी,

मेरे मासूम ख्वाबो जैसी परी|

 

ए हवा जरा तू ही बता,

मेरे यार का पता|

उड़ती रहती थी तेरे जैसी परी|

...ढूँढ रहा हु मे एक नन्ही परी,.

 

नदियों - झरनों मे डूबा मे,

जंगल-परबत से भटका मे|

दिखती नही है लेकिन वो मेरी परी,

...ढूँढ रहा हु मे एक नन्ही परी|

 

मिल जाए कदमो के निसान तो चूम लू,

हो गई क्या ख़ाता मे पूछ लू,

है कहाँ मेरी प्यारी परी,

...ढूँढ रहा हु मे एक नन्ही परी|

 

“In Search of” GUL



रात भर रुलाया किसने



हसती हुई आँखो से गम छुपाया किसने,

तुझको मेरे दिल रात भर रुलाया किसने|

 

छोड़ आया था तेरी यादों को तेरे दर पर,

इनको मेरे घर का पता बताया किसने|

 

सो रहा था तेरी यादों का समंदर मुझमे,

मारकर पत्थर लहरो को जगाया किसने|

 

कर के निकले थे वादा लौट के ना आएँगे,

आ गये, के इस कदर हमको बुलाया किसने|

 

जीते जी तो ना था मेरा कोई अपना,

मरने के बाद मेरा ज़नाज़ा उठाया किसने|

 

“That’s you” GUL



बस एक तमन्ना पूरी हो जाए,



बस एक तमन्ना पूरी हो जाए,

लेकर तुझको बाहों मे चाँद उगाए|

.....बस एक तमन्ना पूरी हो जाए..

 

बैठे हो पेड़ो की छाव मे,

लेकर एक दूजे को बाहों मे|

खोएँ हो एक दूजे मे और,

दूर कहीं सूरज ढल जाए,

....बस एक तमन्ना पूरी हो जाए..

 

बैठे हो किसी सागर के किनारे,

रेत के पन्नो पर उभरे हो नाम हमारे,

चुपके से आके तेरे पैरों को,

चंचल कोई लहेर छू जाए,

....बस एक तमन्ना पूरी हो जाए..

 

भटक रहें हो हम परबत-परबत,

नदियो-झरनो से लिपटी हो जन्नत,

घने किसी जंगल मे हम दोनो खो जाए,

....बस एक तमन्ना पूरी हो जाए..

 

तेरी आँखों से देखे हम दुनिया सारी,

तेरे संग गुज़रे उमर हमारी,

लेकर हाथ तेरा हाथो मे हम,

किसी वादी मे समा जाए|

....बस एक तमन्ना पूरी हो जाए..

 

बस एक तमन्ना पूरी हो जाए..

 

"...the lone wish…” GUL



कही तो वो नदी होगी,



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